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हमारी उपलब्धियाँ


वर्ष 1956 में मध्यप्रदेश राज्य के पुनर्गठन के बाद महाकौशल सहकारी विपणन समिति अस्तित्व में आई और इसका मुख्यालय जबलपुर बना। 1967 में महाकौशल सहकारी विपणन समिति , सहकारी समितियों की शीर्षस्थ संस्था बनी और इसका नाम बदलकर मध्यप्रदेश स्टेट मार्केटिंग फेडरेशन लि. (म.प्र. राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित) हुआ। " मार्कफेड " की स्थापना   कृषि उत्पादों का सहकारी विपणन कर किसानों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से की गई । तत्पश्चात इसका मुख्यालय जबलपुर से भोपाल स्थानांतरित हुआ। प्राथमिक विपणन समितियों की शीर्ष संस्था होने के नाते शुरुआत से ही कृषकों को बेहतर विपणन की सुविधाएं उपलब्ध करवाने,  उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलवाने, उत्पाद की सीधी खरीद कर मध्यस्थों की भूमिका खत्म करने और उचित मूल्य पर कृषि से जुड़ी सामग्री उपलब्ध करवाने का प्रयास किया जाता रहा है । इसका परम लक्ष्य है-किसानों का कल्याण।

विपणन संघ का विस्तृत इतिहास Download | PDF | 453 KB.  

क्र.वर्षनये आयाम
1.1956-57रासायनिक उर्वरक वितरण, आयल इंजन, लोहा इस्पात, सीमेंट, कपास, खाद्यान एवं तिलहन क्रय विक्रय |
2.1958-59आयातित गेहूं का वितरण, समितियों के लिये गोदाम निर्माण |
3.1961-62केरोसीन व्यवसाय |
4.1962-63शासकीय एजेंसी के रूप में शक्कर वितरण कार्य |
5.1963-64दलहन उत्पादन प्रोत्साहन के लिये दाल मिलों की स्थापना |
6.1964-65शासकीय एजेंसी के रूप में ज्वार, चना, चना दाल, बाजरा तथा मक्का क्रय कर अन्य राज्यों को निर्यात |
7.1965-66शासकीय एजेंसी के रूप में ज्वार एवं गेहूं की लेव्ही वसूली | चना, मक्का, बाजरा, का अन्य राज्यों को निर्यात का एकाधिकार | ट्रांसपोर्ट व्यवसाय |
8.1969-70चावल मिलों की स्थापना |
9.1970-71राईस ब्रान मिल की स्थापना, भंडारण गोदामों का निर्माण |
10.1972-73गेहूं लेव्ही उपार्जन हेतु एजेंसी का कार्य |
11.1979-80लघु वनोपज संग्रहण कार्य |
12.1980-81चना एवं गेहूं बीज वितरण कार्य | कपास व्यवसाय |
13.1984-85वेयर हाउसिंग व्यवसाय |
14.2001-02लहसुन का आयात |
15.2004-05पेट्रोलियम एवं बीमा व्यवसाय में प्रवेश |
16.2005-06बीज महासंघ के साथ बीज उत्पादन एवं वितरण योजना को प्रोत्साहन |
17.2007-08डी.ए.पी. की कमी के कारण डी.ए.पी. के आयात की व्यवस्था |